Category Archives: Poetry

The promise

The squeak and squawk of the falling dusk,
Orange gleams the skies,
My heart, once more, soars with the wind
With the feathered ones it flies.
It’s the promise no one made to me,
Troth of the last light.
The unfailing night.

ताना बाना

वक़्त को मैंने कई बार कहा

ज़रा थम भी जा,

पीछे मुड़कर देख कभी

कई ख्वाब बुने हैं मैंने भी।

ताना है अरमानो का, बाना आरज़ू।

वक़्त मुड़ा और हंसकर पुछा

कहाँ हैं ये सपने तेरे?

कीमत क्या है उन ख्वाबों की?

कहना चाहती थी मैं

वो ख्वाब हैं बेकीमती,

पर जब उनको ढूंडा मैंने

देखा वो बिखर चुके थे।

ना ताना था, ना बाना,

चार आंसूं की बूंदों में

बस धुला हुआ रंग बचा था।

यादें

वक़्त की कब्र में सोईं हुई कुछ यादें हैं,

आह से रंगे हुए ख्वाबों की चादर में सिमटी रहती हैं जो|

धुंध के पर्दों के पीछे से झाँका करती हैं जो

कुछ यादें ऐसी भी हैं|

कुछ नींद में मिलती हैं मुझसे

कुछ आँखें चुराया करती हैं|

कुछ यादें ऐसी भी हैं जो हंसती हैं मुझ पर,

कई आंसू का कतरा बन कर गालों को चूमा करती हैं|

कुछ बेबस आँखों से देखती हैं मुझको,

काँधे पर सर रख कर सिसकती भी हैं|

क्यों रूठी हुई यादों में मिलते हो तुम?

क्या सब यादों का हिस्सा हो तुम?

गीले पन्ने

लिखते लिखते कलम

कुछ थम सी गई

देखा तो आंसूं रुक गए थे

सिह्याई कम पड़ सी गई.

कुछ कमी मुझमे ही थी शायद

दर्द रुका तो नहीं फिर भी

आँखों की नमी कुछ जम सी गई.

काग़ज़ के पन्ने कुछ सीले से हैं अब भी,

जाने किस झोंके के इंतज़ार में बैठे हुए.